पंजाब में ‘लाल लकीर’ का अंत: धूरी से CM भगवंत मान ने की ऐतिहासिक शुरुआत, दिसंबर तक 4,000 गांवों को मिलेंगे मालिकाना हक
‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना के तहत लाभार्थियों को बांटे गए प्रॉपर्टी कार्ड; क्यूआर कोड, जीपीएस लोकेशन और ड्रोन मैप से लैस होगी हर संपत्ति

धूरी (संगरूर): पंजाब में दशकों पुराना इंतजार खत्म करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने ‘मेरा घर मेरे नाम’ (Mera Ghar Mere Naam) योजना के तहत गांवों में लाल लकीर (Lal Lakir) के अंदर बने मकानों के मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। संगरूर के धूरी में आयोजित विशाल जनसभा के दौरान लाभार्थियों को संपत्ति के आधिकारिक मालिकाना हक प्रमाण पत्र सौंपते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पंजाब समाचार (Punjab News) से जुड़ी पहल का उद्देश्य हर योग्य ग्रामीण परिवार को उसके आशियाने की कानूनी सुरक्षा देना है। प्रॉपर्टी कार्ड (Property Card) मिलने के बाद अब ग्रामीणों पर से अदालतों और सरकारी कार्रवाई की तलवार हमेशा के लिए हट जाएगी।
ड्रोन मैपिंग और डिजिटल क्यूआर कोड से लैस होंगे प्रॉपर्टी कार्ड
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि इस योजना के तहत निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है:
- ड्रोन सर्वे और जीपीएस लोकेशन: आबादी क्षेत्र के प्रत्येक मकान और प्लॉट का सटीक ड्रोन सर्वे कर जीपीएस लोकेशन तय की जा रही है।
- डिजिटल पहचान: हर संपत्ति को एक विशिष्ट यूनिट नंबर, जीपीएस कोड, ड्रोन मैप और सत्यापन योग्य क्यूआर (QR) कोड वाला डिजिटल प्रॉपर्टी कार्ड दिया जा रहा है।
- बैंक ऋण की सुविधा: इस आधिकारिक कानूनी दस्तावेज के आधार पर लोग जरूरत पड़ने पर अपने मकानों पर बैंकों से आसानी से लोन ले सकेंगे।
चार चरणों में दिसंबर तक पूरा होगा लक्ष्य
राज्य को ‘लाल लकीर’ से पूरी तरह मुक्त करने के लिए सरकार ने चरणबद्ध खाका तैयार किया है:
- पहला चरण: संगरूर जिले के 221 गांवों सहित पंजाब भर के 2,295 गांवों में कार्ड बांटे जा रहे हैं।
- दूसरा चरण: राज्य के 1,668 गांवों को कवर किया जाएगा।
- तीसरा व चौथा चरण: नवंबर और दिसंबर महीने में चलाकर इस वर्ष के अंत तक राज्य के सभी 4,000 से अधिक गांवों को इसके दायरे में ले आया जाएगा।
