“अमानवीय देरी बर्दाश्त नहीं”: CM भगवंत मान बोले— केंद्र के ढुलमुल रवैये के बावजूद बंदी सिंहों की रिहाई के लिए लड़ेंगे कानूनी लड़ाई
कौमी इंसाफ मोर्चा और सिख संगठनों से चंडीगढ़ में उच्चस्तरीय बैठक; मुख्यमंत्री ने कहा— हवारा की पैरोल से पंजाब की कानून-व्यवस्था पर नहीं पड़ेगा कोई प्रतिकूल असर
चंडीगढ़, 12 अक्टूबर 2026:
पंजाब में लंबे समय से लंबित बंदी सिंहों की रिहाई (Release of Bandi Singhs) के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान (Bhagwant Singh Mann) ने बड़ा प्रशासनिक व राजनीतिक कदम उठाया है। चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास पर कौमी इंसाफ मोर्चा (Qaumi Insaaf Morcha), सिख संगठनों और किसान यूनियनों के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मान ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार बंदी सिंहों की जल्द रिहाई के लिए हर संवैधानिक और कानूनी रास्ता अपनाएगी। पंजाब राजनीति (Punjab Politics) में आए इस नए मोड़ के तहत पंजाब समाचार (Punjab News) में यह बयान छाया हुआ है कि सालों से जेलों में बंद सिख कैदियों को न्याय दिलाने में अनिश्चितकालीन देरी नहीं होनी चाहिए।

“केंद्रीय गृह मंत्री को दी थी गारंटी, फिर भी नहीं मिली हवारा को पैरोल”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने खुलासा किया कि उनकी सरकार ने बीमार मां से मिलने के लिए जगतार सिंह हवारा (Jagtar Singh Hawara Parole) को पैरोल देने की सिफारिश की थी।
- केंद्र को कानून-व्यवस्था का आश्वासन: पंजाब सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पंजाब के राज्यपाल को लिखित आश्वासन दिया था कि हवारा को पैरोल मिलने पर राज्य में शांति और कानून-व्यवस्था पूरी तरह से बनी रहेगी।
- केंद्र पर टालमटोल का आरोप: मुख्यमंत्री ने अफ़सोस जताया कि राज्य सरकार द्वारा जिम्मेदारी लेने के बावजूद केंद्र सरकार ने अभी तक पैरोल को हरी झंडी नहीं दी है।
- अमन-शांति की मिसाल: उन्होंने कहा कि यदि हवारा को कुछ दिनों की भी पैरोल मिलती है, तो यह साबित कर देगा कि पंजाब में शांति और आपसी भाईचारा पूरी तरह मजबूत है, जिससे अन्य बंदी सिंहों के रिहाई का रास्ता भी साफ हो सकता है।
एडवोकेट जनरल को हर केस की कानूनी समीक्षा के निर्देश
मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री मान ने पंजाब के एडवोकेट जनरल (AG) मनिंदरजीत सिंह बेदी को निर्देश दिए कि वे प्रत्येक बंदी सिंह के केस का कानूनी अध्ययन करें ताकि सौहार्दपूर्ण और स्थायी समाधान निकाला जा सके। बैठक में संत सेवा सिंह रामपुर खेड़ा, गुरदीप सिंह बठिंडा, भाई मोहकम सिंह, गुरसेवक सिंह कहानेके और किसान नेता बूटा सिंह बुर्जगिल समेत कई वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद रहे।
