कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन का आरोप— एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के जरिए बड़े पैमाने पर हटाए गए मतदाताओं के नाम; भाजपा ने इसे बताया निराधार।
नई दिल्ली:
देश के राजनीतिक गलियारों में Voter List Revision SIR Controversy और Election Commission Role India से जुड़े मुद्दे इस समय सबसे बड़ा राजनीतिक भूचाल ला चुके हैं। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा लगाए गए उन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें विपक्ष पर सड़क पर उतरकर हिंसक तरीके से सरकार बदलने का दावा किया जा रहा था। चिदंबरम ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से गांधीवादी तरीकों और लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में रहकर विरोध प्रदर्शन करने में विश्वास रखती है, और उसने कभी भी किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधि का समर्थन नहीं किया है।
विपक्ष का मुख्य आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर देश भर में लगभग 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जिससे आम नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है। इस संबंध में ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया है। दूसरी ओर, सत्ताधारी दल भाजपा ने विपक्ष के इन बयानों को देश की संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और जनता को गुमराह करने का कुचक्र करार दिया है। इस तीखे राजनीतिक टकराव के कारण संसद से लेकर सड़क तक सियासी पारा पूरी तरह से गर्म है।
