परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड पर राजनीतिक घमासान: भाजपा का भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला, मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग

harsimrat kaur badal

“पंजाब में नशा विरोधी आवाजों को गोलियों से चुप कराया जा रहा है”: मानसा हत्याकांड और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर विपक्ष का सरकार पर फूटा गुस्सा

चंडीगढ़:

पंजाब के मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा (Parvinder Singh Jhota Murder Case) की दिनदहाड़े हुई निर्मम हत्या और राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। विपक्षी दलों और विशेषकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार (AAP Punjab Government) और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान (Bhagwant Singh Mann) पर तीखा प्रहार करते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि महज एक एसएचओ को निलंबित करना लीपापोती (Eyewash) है, जबकि असली दोषियों और संरक्षण देने वाले बड़े चेहरों को बचाया जा रहा है।

गंभीर आरोप और राज्यव्यापी ‘पंजाब बंद’ का असर

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि पंजाब में नशा माफिया के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवाओं और कार्यकर्ताओं को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए विपक्षी मंचों से आरोप लगाया गया कि:

  • मोहनजीत सिंह: जिन्हें कथित तौर पर बिजली के झटके दिए जाने का मामला सामने आया।
  • गुलजार सिंह: जिनकी आत्महत्या की घटना ने प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े किए।
  • परविंदर सिंह झोटा: जिन्हें कैमरे के सामने पॉइंट-ब्लैंक रेंज पर गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया।

इन सनसनीखेज मामलों के विरोध में आहूत ‘पंजाब बंद’ (Punjab Bandh October 15) के दौरान राज्य के कई हिस्सों में बाजार बंद रहे और व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। पीड़ित परिवार और विभिन्न जत्थेबंदियों ने न्याय की मांग करते हुए प्रशासन के खिलाफ कड़ा रोष व्यक्त किया है।

विपक्ष की प्रमुख मांगें और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग

भारतीय जनता पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर इस पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है। विपक्ष द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  1. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और गृह मंत्रालय संभाल रहे मंत्रियों का तुरंत इस्तीफा।
  2. नशा तस्करों को कथित संरक्षण देने के आरोपों से घिरे विधायक विजय सिंगला की निष्पक्ष जांच।
  3. घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे संबंधित जिलों के एसएसपी और डीएसपी को तुरंत बर्खास्त किया जाए।
  4. राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) का इस्तीफा, ताकि स्वतंत्र जांच का मार्ग प्रशस्त हो सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना के बाद पंजाब की आंतरिक सुरक्षा और नशा मुक्ति अभियानों की प्रामाणिकता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और अधिक गहरा सकता है।

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