“चुनाव आयोग की स्वायत्तता को सुनियोजित तरीके से किया गया कमजोर”: उद्योग मंत्री अमन अरोड़ा ने 2023 के चयन कानून को बताया ‘संस्थागत कब्जा’
चंडीगढ़, 23 अक्टूबर 2026:
पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश प्रधान अमन अरोड़ा (Aman Arora) ने पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि देश का चुनावी ढांचा इतिहास के सबसे गंभीर संस्थागत संकट से गुजर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की स्वायत्तता को कमजोर कर देश को ‘निर्वाचित तानाशाही’ की ओर धकेला जा रहा है।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और 2023 के कानून पर सवाल
सदन में पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा से जुड़े प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि लोकतंत्र केवल सत्ता के बल पर नहीं, बल्कि निष्पक्षता और ईमानदारी पर टिकता है। उन्होंने 2023 के उस नए कानून की कड़ी आलोचना की जिसके तहत चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को बाहर कर उनकी जगह एक केंद्रीय मंत्री को शामिल कर लिया गया है।
- अल्पमत में विपक्ष: इस बदलाव के कारण चयन समिति में विपक्ष के नेता पूरी तरह अल्पमत में रह जाते हैं।
- संस्थागत क्षरण: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन और अशोक लवासा के कार्यकाल का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आज प्रशासनिक दबाव के कारण निष्पक्ष अधिकारियों का मनोबल टूट रहा है।
- युवाओं का घटता विश्वास: देशभर के युवाओं द्वारा चुनाव प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल इस बात का संकेत हैं कि निष्पक्षता पर जनता का भरोसा डगमगा रहा है।
अमन अरोड़ा ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की ‘आत्मा’ को बचाने की है, जिसके लिए राज्य के लोगों को एकजुट होकर आगे आना होगा।
