पंजाब में शिक्षा और सिंचाई क्षेत्र में बड़ा बदलाव: नहरी पानी से सींचे जा रहे 80% खेत, NEET में सरकारी स्कूल के 882 बच्चे हुए सफल

1,587 गांवों में पहली बार पहुंचा नहरी पानी; नशों को दूर भगाने के लिए राज्य में बनाए जा रहे 3,100 खेल स्टेडियम
बल्लरां (संगरूर):
संगरूर जिले में ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब में शिक्षा, कृषि सिंचाई और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में आए क्रांतिकारी बदलावों की विस्तृत जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ मुफ्त की रेवाड़ियों या रियायती कार्डों से गरीबी खत्म नहीं हो सकती; शिक्षा ही वह एकमात्र चाबी है जो गरीब परिवारों को सशक्त बनाकर उनका जीवन स्तर सुधार सकती है। उन्होंने बताया कि ‘स्कूल ऑफ एमिनेन्स’ (Schools of Eminence) और शिक्षकों के प्रशिक्षण के चलते सरकारी स्कूलों के नतीजों में अभूतपूर्व सुधार आया है।
NEET परीक्षा में 11 गुना बढ़ा सरकारी स्कूलों का दबदबा
शिक्षा क्षेत्र में आए सुधारों का आंकड़ा पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया:
- वर्ष 2021 में: केवल 80 सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों ने NEET (मेडिकल प्रवेश परीक्षा) पास की थी।
- वर्ष 2026 में: यह संख्या 11 गुना से अधिक बढ़कर 882 विद्यार्थी हो गई है।
उन्होंने कहा कि आम और गरीब परिवारों के बच्चे अब देश के शीर्ष मेडिकल कॉलेजों और प्रशासनिक पदों तक पहुंच रहे हैं, जो पंजाब के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
80 प्रतिशत कृषि भूमि तक पहुंचा नहरी पानी
पंजाब के कृषि संकट और गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा:
- ₹7,200 करोड़ की लागत: नहरी सिंचाई के नेटवर्क के विस्तार पर ₹7,200 करोड़ खर्च किए गए हैं।
- 1,587 नए गांव कवर: पंजाब के इतिहास में पहली बार 1,587 ऐसे गांवों के खेतों तक नहरी पानी पहुंचाया गया है, जहां आजादी के बाद से कभी नहर का पानी नहीं पहुंचा था।
- सिंचाई कवरेज में उछाल: मान सरकार के कार्यकाल के दौरान नहरी सिंचाई का दायरा 26 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत से अधिक हो गया है। सिंचित रकबा 20.89 लाख एकड़ से बढ़कर अब 60.30 लाख एकड़ हो चुका है।
युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए 3,100 स्टेडियम
पंजाब के युवाओं को नशों के दलदल से दूर रखने और खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए राज्य भर में 3,100 खेल स्टेडियम विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, राज्य भर में आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 45,000 किलोमीटर लंबी सड़कों के सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।
