मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर भारत निर्वाचन आयोग ने अपना पक्ष रखा है। ECI ने CEC को काम करने से रोकने की मांग का विरोध करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 का हवाला दिया है।
आयोग का कहना है कि चुनाव आयोग एक सामूहिक संवैधानिक संस्था है और उसके कामकाज की प्रक्रिया कानून में निर्धारित है।
SIR आदेशों पर ECI की सफाई
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े आदेशों को लेकर उठे विवाद पर आयोग ने कहा कि 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को जारी किए गए आदेश सर्वसम्मति से पारित किए गए थे।
ECI ने एकतरफा निर्णय लेने के आरोपों को भी खारिज किया है।
आयोग का कहना है कि फैसलों से पहले संबंधित फाइलों और दस्तावेजों पर विचार किया गया और इन्हें CEC तथा दोनों चुनाव आयुक्तों के समक्ष मंजूरी के लिए रखा गया।
क्या सिर्फ आपत्ति दर्ज करना असहमति माना जाएगा?
यही इस मामले का महत्वपूर्ण कानूनी सवाल बन गया है।
याचिका में कथित तौर पर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों और आंतरिक टिप्पणियों का हवाला दिया गया है। ECI का तर्क है कि किसी फाइल पर सुझाव, सवाल या टिप्पणी को अपने आप में आयोग का अंतिम फैसला या औपचारिक असहमति नहीं माना जा सकता।
आयोग के अनुसार अंतिम आदेश आधिकारिक फाइलों में दर्ज हुए और सचिवालय के जरिए लागू किए गए।
Section 18 में क्या है?
धारा 18 चुनाव आयोग के कामकाज के निपटारे यानी Disposal of Business से संबंधित है।
इसके तहत आयोग अपने कामकाज की प्रक्रिया को विनियमित कर सकता है और CEC तथा अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच जिम्मेदारियां बांट सकता है।
कानून में यह भी कहा गया है कि जहां तक संभव हो, फैसले सर्वसम्मति से किए जाने चाहिए। अगर सदस्यों के बीच मतभेद होता है तो बहुमत की राय के आधार पर फैसला लिया जाता है।
CEC को रोकने के खिलाफ ECI की दलील
ECI का कहना है कि CEC को काम करने से रोकने का निर्देश उस कानूनी ढांचे के विपरीत होगा जिसके तहत चुनाव आयोग अपना काम करता है।
आयोग ने यह भी कहा कि याचिका में जिन आरोपों का आधार बनाया गया है, वे कथित मीडिया रिपोर्ट और संबंधित सामग्री पर आधारित हैं और उनसे एकतरफा फैसले लेने का आरोप साबित नहीं होता।
अब अदालत के सामने क्या सवाल?
मामले में महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या कथित आंतरिक आपत्तियां किसी अंतिम निर्णय पर औपचारिक मतभेद थीं और क्या आयोग ने धारा 18 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया।
ECI ने अपने जवाब में कहा है कि SIR से जुड़े आदेश संविधान के अनुच्छेद 324 और लागू कानूनों के अनुरूप जारी किए गए हैं।
