“धार्मिक स्थलों का प्रबंधन राजनेताओं के बजाय धार्मिक विद्वानों द्वारा किया जाना चाहिए”: अमृतसर में भगवान वाल्मीकि प्रकट दिवस पर सीएम मान का बड़ा ऐलान
राम तीर्थ को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही मान सरकार; मुख्य मंदिर, पवित्र सरोवर, सराय और आधुनिक सुविधाओं का हो रहा कायाकल्प
अमृतसर / चंडीगढ़, 26 अक्टूबर 2026:
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान (Bhagwant Singh Mann) ने अमृतसर स्थित ऐतिहासिक महर्षि भगवान वाल्मीकि तीर्थ स्थल (राम तीर्थ) पर राज्य स्तरीय समारोह में शिरकत कर नतमस्तक होने के साथ ही तीर्थ स्थल के विकास के लिए 17.72 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय राशि जारी करने की आधिकारिक घोषणा की। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि पंजाब की इस पवित्र धरती पर हर अच्छी फसल और विचार का बीज उग सकता है, लेकिन नफरत का बीज यहां कभी नहीं पनप सकता।
विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल और आधुनिक सुविधाओं का विस्तार
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि महर्षि भगवान वाल्मीकि जी की आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सरकार की मुख्य प्राथमिकता है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान तीर्थ स्थल पर किए जा रहे विकास कार्यों का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया:
- सरोवर और मुख्य मंदिर का सौंदर्यीकरण: पवित्र सरोवर की विशेष सफाई, मुख्य मंदिर की इमारत की मरम्मत और सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है।
- आवासीय एवं सीवरेज सुविधाएं: मंदिर परिसर और सराय में एयर कंडीशनर (AC) लगाने तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को पूरी तरह चालू करने के लिए 2.60 करोड़ रुपये अलग से खर्च किए जा रहे हैं।
- साउंड सिस्टम और सुरक्षा: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आधुनिक साउंड सिस्टम और सुरक्षा की दृष्टि से हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं।
- पूर्व में पूरे हुए प्रोजेक्ट: वर्ष 2024 में 25 करोड़ रुपये की लागत से भगवान वाल्मीकि जी के जीवन पर आधारित भव्य ‘पैनोरमा’ श्रद्धालुओं को समर्पित किया जा चुका है, जबकि रात की खूबसूरती बढ़ाने के लिए फसाड लाइटिंग (विशेष प्रकाश व्यवस्था) भी की गई है।
“धार्मिक स्थानों का प्रबंधन धार्मिक विद्वानों के हाथ हो”
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक संस्थाओं को अपनी पवित्र परंपराओं के अनुरूप चलना चाहिए। उनका मानना है कि धार्मिक स्थलों का प्रबंधन किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप के बिना संबंधित धर्म के विद्वानों और धार्मिक हस्तियों द्वारा ही किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना’ के तहत श्रद्धालुओं को भगवान वाल्मीकि तीर्थ स्थल के दर्शन करवाने की सुविधा का भी विशेष उल्लेख किया।
